महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ संतो-योगियों की परम्परा के चमकते नक्षत्र: योगी आदित्यनाथ


मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री गोरक्षपीठ की समृद्ध परम्परा को नई दिशा देने वाले युगपुरूष महंत दिग्विजयनाथ और राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ भारतीय संस्कृति और संतो-योगियों की परम्परा के दिव्याकाश में चमकते हुए नक्षत्र हैं। उनका व्यक्तित्व, कृतित्व तत्कालीन देश काल और परिस्थितियों की चुनौतियों का समाधान करते हुए देश, समाज और धर्म को समर्पित था। उनकी पूर्ण स्मृति में प्रति वर्ष सप्ताह भर धार्मिक आध्यात्मिक आयोजनों के साथ सम सामयिक विषयों पर सम्मेलन आयोजित कर हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

मुख्यमंत्री बुधवार को गोरखनाथ मन्दिर के स्मृति भवन सभागार में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 50वीं एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 5वीं पुण्यतिथि समारोह के अन्तर्गत ‘श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
इसके पूर्व उन्होंने दोनों ब्रह्मलीन महंत के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

दोनों संतों की स्मृतियां नई ऊर्जा देती हैं

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दोनों महंत राष्ट्रवादी चरित्र एवं आध्यात्मिक चेतना प्रदीप्त संत थे। जिन्हें अतीत, अनागत और वर्तमान सभी को प्रत्यक्ष देखने की समझता थी। हिन्दू समाज के रक्षक थे। देश में वे अध्यात्मिक-सामाजिक पुर्नजागरण के अग्रदूत के रुप में प्रतिष्ठित हुए। पूर्वी उत्तर प्रदेश में शैक्षणिक जागरण के अग्रदूत बन कर उभरे। दोनों संत अपने पार्थिव रुप में हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका कृतित्व आज भी प्रकाश स्तम्भ की तरह राजपथ पर मार्गदर्शन के विद्यमान है। उनकी पावन स्मृति में सप्तदिवसीय श्रद्धांजलि समारोह 12 सितंबर से 18 सितंबर तक गोरखनाथ मंदिर में संपंन होगा। यह वर्ष महंत दिग्विजयनाथ का 125वां जयंती वर्ष एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का जन्म शताब्दी वर्ष है। दोनों संतों पर पूरे वर्ष समारोह पूर्वक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

धर्म भारत का प्राण, संस्कृति आत्मा

सीएम ने कहा कि धर्म भारत का प्राण है। संस्कृति भारत की आत्मा है। भारतीय धर्म और संस्कृति का दर्शन भारतीय धर्म-ग्रन्थों में होता है। ‘श्रीमद्भागवत कथा’ भारतीय धर्म-संस्कृति के ही मूल तत्व का उद्घाटन करती है। जब देश विपरीत परिस्थितियों में रहा है। संकर्मण काल से गुजरा है, उस समय देश और समाज को एक करने का काम इन्हीं कथाओं ने किया है। ‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ के आयोजन के पीछे यही उद्देश्य है कि भारतीय धर्म-संस्कृति की सुगन्ध घर-घर में पहुंचे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भी दुष्टों के पतन और धर्म की प्रतिष्ठा के लिए भगवान के अवतरण की कथा है।

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