चंद्रयान-2 : पृथ्‍वी के इतिहास के रहस्‍य से पर्दा उठाएगा


चंद्रयान-2चांद के उस हिस्‍से से जुड़ने जा रहा है जो पूरी दुनिया के लिए अभी तक रहस्‍यमयी और अछूता है। अभी तक चांद की सतह पर अमेरिका,रूस और चीन के चंद्रयान उतरे हैं वे इस दक्षिणी ध्रुव से दूर रहे। चंद्रमा का यह भाग उत्‍तरी ध्रुव की तुलना में बहुत बड़ा है और अधिकांश समय सूर्य की रोशनी यहां नहीं पड़ती। यह अभियान चंद्रमा के इसी हिस्‍से से पूरी दुनिया को बहुत सी अनछुई,अनजाने और चकित कर देने वाले तथ्‍यों से रू-ब-रू कराएगा।

यह कहना है इसरो में रिसर्च असिस्‍टेंट के तौर पर कार्यरत रहे और चंद्रयान-एक का हिस्‍सा बने डॉ.अनिल यादव का। वे इस वक्‍त चौ.चरण सिंह विवि के फिजिक्‍स विभाग में असिस्‍टेंट प्रोफेसर हैं।

डॉ.अनिल यादव के अनुसार चंद्रयान-2पूरी दुनिया में भारत की विज्ञान और अंतरिक्ष में पकड़ को मजबूत करेगा। चूंकि सॉफ्ट लेंडिंग उस हिस्‍से पर हो रही है जिस पर दुनिया से पहले पहुंचे तीन देश भी नहीं पहुंचे,ऐसे में यह सफलता अद्वितीय होगी। यह मिशन पृथ्‍वी के प्रारंभिक इतिहास के बहुत सारे रहस्‍यों से पर्दा उठाएगा। यह वैज्ञानिक तथ्‍य है कि चंद्रमा कभी पृथ्‍वी का ही हिस्‍सा हुआ करता था। ऐसे में चांद का अनछुआ और सूर्य की रोशनी से दूर दक्षिणी ध्रुव पृथ्‍वी के इतिहास के बहुत से रहस्‍यों से पर्दा उठा सकता है। चंद्रयान-2चांद की सतह के नीचे पानी और उसकी मात्रा की मौजूदगी का भी आकलन करेगा। यही नहीं दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में गहरे और ठंडे क्रेटर हैं जिसमें प्रारंभिक सौर मंडल के शुरुआती चिह्नन मिल सकते हैं।

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