50 करोड़ से स्मार्ट होगा गोरखपुर, आम लोगों को बेहतर सुविधा की उम्मीद
यूपी कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में गोरखपुर को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने को लेकर मुहर के बाद लोग बेहतरी की उम्मीद कर रहे हैं। महापौर समेत आम लोगों को उम्मीद है कि अब शहर में ड्रेनेज, कूड़ा निस्तारण, सड़क आदि को लेकर नई योजनाओं पर अमल होगा।
वर्ष 2015 में शुरू हुई केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना में गोरखपुर अपनी कई खामियों के चलते दौड़ से बाहर हो गया था। अब प्रदेश सरकार ने अपने स्तर से सात शहरों को स्मार्ट सिटी की सुविधाएं देने के लिए चुना है। इसमें गोरखपुर भी शामिल है। महापौर सीताराम जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री शहर की जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। स्मार्ट सिटी के लिए जो मानक रखे गए हैं, उनमें से कई कार्य हो रहे हैं।
सीवर लाइन और सालिड वेस्ट मैनेजमेंट की सुविधा भी जल्द शहरियों को मिलेगी।
स्मार्ट सिटी के लिए चाहिए 3000 करोड़
जिन शर्तों को स्मार्ट सिटी के लिए अनिवार्य किया गया है, उसे पूरा करने के लिए करीब 3000 करोड़ की दरकार है। नगर विकास विभाग ने स्मार्ट सिटी के लिए कई शर्तों को जोड़ा है। नगर निगम दो सुविधाओं को लेकर मुश्किलों में हैं। पहला, सीवर लाइन और दूसरा सालिड वेस्ट मैनेजमेंट। जलनिगम शहर के 5 फीसदी इलाके में सीवर लाइन बिछा रहा है जिसपर करीब 80 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। पूरे शहर में सीवर लाइन को लेकर जलनिगम ने जो प्रस्ताव तैयार किया है, उसके मुताबिक करीब 2000 करोड़ खर्च होंगे। 2009 में नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम शुरू किया था। लेकिन 10 साल बाद भी यह कवायद शुरुआती स्तर पर ही लटकी हुई है। गीडा में कूड़ा निस्तारण को लेकर जमीन तलाशी जा रही है। जिसके लिए करीब 50 करोड़ की आवश्यकता है।
स्मार्ट सिटी के मानकों को पूरा कर रहा शहर
मॉडल पार्क
नगर निगम ने मॉडल पार्क के लिए लाल डिग्गी को चिन्हित कर लिया है। जिसमें ओपेन जिम से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही ही हैं। दो महीने के अंदर अत्याधुनिक पार्क बनकर तैयार हो जाएगा।
हेरिटेज
पर्यटन विभाग इमामबाड़ा, मानसरोवर, बर्डघाट रामलीला समेत कई हेरिटेज को विकसित कर रहा है। कई योजनाओं के लिए पैसा भी जारी कर दिया गया है। सूरजकुण्ड के सुंदरीकरण का काम भी शुरू हो चुका है।
इलेक्ट्रिक बस
शहर में 10 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को लेकर की तैयारी पूरी है। बरगदवा के पास चार्जिंग स्टेशन बनाया जा रहा है।
जलापूर्ति
शहर के 70 फीसदी क्षेत्र में ही जलकल पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। वहीं करीब 70 करोड़ की योजनाएं चल रही हैं। 24 घंटे जलापूर्ति के लिए अभी 200 करोड़ से अधिक की जरूरत है।
सड़क
शहर की सड़कें चौड़ी होनी चाहिए। शहर में कई सड़कों का निर्माण हो चुका है तो कई प्रस्तावित हैं। सड़कों के चौड़ीकरण पर करीब 400 करोड़ रुपये चाहिए।
डस्टबिन
नगर निगम ने प्रमुख मार्गों पर 500 मीटर पर हरा और नीला डस्टबिन लगाया है। करीब दो हजार डस्टबिन लगाए गए हैं। हालांकि ये डस्टबिन फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
पौधरोपण
शहर की सभी प्रमुख सड़कों के किनारे नगर निगम पौधरोपण करा रहा है। पिछले अगस्त महीने में करीब एक लाख पौधे नगर निगम, जीडीए और वन विभाग की तरफ से लगाए गए हैं।

Comments
Post a Comment