आय बढ़ाने, मनमानी खर्चों में कटौती सहित कई बड़े सुधारों की तैयारी में योगी सरकार, ये है पूरी योजना
राज्य सरकार राजस्व वृद्धि के नए स्रोत तलाशने, वसूली बढ़ाने और कोषागारों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के साथ पेट्रोल-डीजल सहित अन्य मदों में अनावश्यक खर्चों में कटौती से जुड़े सुधार की ओर कदम बढ़ाने जा रही है। नवनियुक्त वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने अपर मुख्य सचिव वित्त को इस संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने प्रशासनिक सुधार के एजेंडे के हर बिंदु से जुड़ी कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करने को कहा है। खन्ना ने वित्त मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद दिए इंटरव्यू में आय बढ़ाने, अनावश्यक खर्चों में कटौती सहित प्रशासनिक व वित्तीय कामकाज में सुधार के संकेत दिए थे। अब उन पर पहल नजर आने लगी है। अर्से से शासन के तमाम मंत्री और अफसर तय मानक से अधिक वाहन अपने साथ रखते आ रहे हैं।
नियमानुसार उन्हें मिलने वाले वाहनों के अलावा वे विभाग में दूसरी जरूरतों के नाम पर रखे गए वाहनों को अपने साथ संबद्ध कर लेते हैं। ऐसे निजी सचिव, अपर निजी सचिव व संयुक्त सचिव तक सरकारी वाहन लेकर चलते हैं जो इसके पात्र ही नहीं हैं।
विभागों के अफसरों द्वारा मासिक पेट्रोल-डीजल के खर्च पर मांगी रिपोर्ट
वित्त मंत्री ने सभी विभागों से अलग-अलग यह पूछने को कहा है कि उनके विभागों में पेट्रोल-डीजल पर कितना मासिक खर्च हो रहा है। उन्होंने लॉग बुक ठीक से मेनटेन करने और गाड़ियों पर गैरजरूरी खर्च न किया जाना सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाने को कहा है।
इसी तरह कोषागारों में मनमानी आपत्ति लगाने की शिकायतें आम हैं। सेवानिवृत्त कर्मियों तक के भुगतान में बेवजह रोड़े अटकाने से सरकार की छवि खराब हो रही है। इसे देखते हुए मंत्री ने सभी कोषागारों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, कोषागारों में बिल समय से प्रस्तुत करने और इसे ऑनलाइन जनरेट करने की व्यवस्था करने को कहा है।
खन्ना ने कहा कि कोषागारों में बिलों पर अनावश्यक आपत्तियां लगाने की परिपाटी तत्काल रोकी जाए और इसकी मानीटरिंग के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसे पूरी प्रणाली पारदर्शी नजर आए।
इन सुधारों के लिए भी निर्देश
- सभी विभागों से खर्चों में कटौती व मितव्ययिता बरतने के संबंध में एक सप्ताह में सुझाव देने के निर्देश।
- राजस्व व आय में वृद्धि के लिए सभी संबंधित विभागों से सुझाव लेने और उसका परीक्षण कर 15 दिन में उसे पेश करने को कहा है।
- राजस्व संग्रह से जुड़े विभागों को शासन से दिए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश। लक्ष्य प्राप्त करने के लिए साप्ताहिक समीक्षा कर हर महीने इसकी प्रगति बताई जाए।
- वित्त विभाग एक ऐसा मैकेनिज्म विकसित करे जिसमें राजस्व संग्रह वाले हर विभाग की साप्ताहिक प्रगति ऑनलाइन देखी जा सके।
- सभी डीएम को यह निर्देश दें कि वे उप जिलाधिकारियों के साथ हर सप्ताह बैठक राजस्व वसूली की समीक्षा करें और हर 15 दिन में एक बार शासन को प्रगति बताएं।
- विभागों को फरवरी में बजट खर्च करने की प्रवृत्ति से रोकने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें।
- वित्त विभाग केंद्र सहायतित परियोजनाओं की समीक्षा महीने में दो बार करे ताकि मंत्री के स्तर से हर महीने इसकी जानकारी प्राप्त की जा सके।
- रजिस्ट्रार चिट फंड सोसाइटी के कार्यालयों से जुड़ी पूरी व्यवस्था ऑनलाइन करें। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी बनाएं।
- रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार के कार्यालयों में शिकायतों के निस्तारण व कार्यों में निष्पक्षता से निर्णय लें। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व उत्तरदायित्वपूर्ण बनाया जाए।

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