लोककल्‍याण और राष्‍ट्रीय चेतना के केंद्र बनें मठ-मंदिर: योगी


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है किमठ और मन्दिरों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि लोक कल्याणकारी कार्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय भावना के कार्यो में भी उन्हें सबसे आगे रहना चाहिए। भारत में संतो की परम्परा बहुत ही समृद्धशाली और प्राचीन है। अपने आध्यात्मिक चेतना से संत-समाज राष्ट्र को सुषुप्ता अवस्था से जागृत अवस्था में लाने के लिए सदैव प्रयत्नरत रहा है। संतो की यह परम्परा न केवल मनुष्य अपितु जीवमात्र का मार्ग प्रशस्त करती है। मुख्यमंत्री गुरुवार को गोरखनाथ मन्दिर के दिग्विजयनाथ सभागार में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 125वीं जयंती व 50वीं पुण्यतिथि और महंत अवेद्यनाथ की जन्मशताब्दी व 5वीं पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय पुनर्जागरण और सन्त समाज विषय पर आयोजित संगोष्ठी को सबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जब भी लोक-कल्याण की बात आती है तो संत-समाज सबसे आगे रहता है। महर्षि विश्वामित्रऔर वशिष्ट के लोक कल्याणकारी कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब रावण जैसे आतंकवादी आर्यावर्त को नष्ट करने के लिए तत्पर हो रहे थे। उस समय देश के दो शक्तिशाली राष्ट्र मिथिला और अयोध्या को इस बात की चिंता नहीं थी। सर्वप्रथम महर्षि विश्वामित्र को चिंता व्याप्त हुई और उन्होंने अपने दृष्टि से जान लिया कि अब मिथिला और अयोध्या को एक होना है तथा राम को आगे आकर राष्ट्र की रक्षा करनी है। इसलिए उन्होंने यज्ञ के बहाने से श्रीराम और लक्ष्मण को आगे लाकर राष्ट्र रक्षा का कार्य किया। यह परम्परा अनवरत बनीं रहे इसके लिए संत परम्परा ने शास्त्रों की सरल व्याख्या कर समाज को एक करने का काम किया। एक तरफ महर्षि विश्वामित्र ने राम के चरित्र का उपयोग किया तो दूसरी तरफ महर्षि वाल्मीकि ने उनके चरित्र को अपने रामायाण में निरूपित कर समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया। महर्षि वेदव्यास ने भारत की परम्परा को दुनिया के सामने रखते हुए कहा कि महाभारत में जो भी कुछ है। वही सम्पूर्ण संसार में है। अर्थात् सम्पूर्ण संसार का अध्ययन महाभारत का अध्ययन करने से हो जायेगा।

शंकराचार्य को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक सन्यासी को लगा कि भारत कई टुकड़ों मे बटा है तो वह केरल से निकलकर भारत के चारों कोनों में पीठ स्थापित कर भारत को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। संत समाज ने समाज के सभी वर्गो को समान भाव से देखकर जातिवादी कुरीतियों पर गहरा प्रहार किया।एक प्रेरक प्रसंग का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जब सन्यास लेना चाह रहे थे तो स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल अपने लिए ही नहीं होता अपितु वास्तविक सन्यास समाज की सेवा में है। उनके इस मूल मंत्र को लेकर स्वामी जी ने भारतीय आध्यात्म और संस्कृति की परम्परा का लोक कल्याणकारी पाठ पूरी दुनिया को पढ़ाया। यह दुर्भाग्य की बात है कि जिस 11 सितम्बर को स्वामी विवेकानन्द ने पूरी दुनिया को आध्यात्म और शान्ति का संदेश दिया उसी 11 सितम्बर को वर्ड ट्रेड सेन्टर पर आतंकी हमला हुआ।

Comments

Popular posts from this blog

पिपराईच - हाटा मार्ग पर बड़ा हादसा पिता - पुत्र गम्भीर रूप से घायल

ब्रेकिंग गोरखपुर - नंदानगर रेलवे क्रासिंग के पास अज्ञात बदमाशों ने दो लड़कों को मारी गोली हालात गम्भीर

सीएम योगी ने गोरखपुरवासियो को दी कई सौगातें