जिला जेल के एक बंदी की फिर मौत
देवरिया। जिला जेल के एक और बंदी की मौत - दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में मार्च 2015 से कारागार में बंद था लार का रिजवान
- तबीयत खराब होने पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कराया गया था भर्ती
देवरिया। किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में वर्ष 2015 से जिला जेल में निरुद्ध एक बंदी की शुक्रवार रात गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। मृतक रिजवान (30) लार के शमशीर नगर का रहने वाला था। तीन दिन पूर्व तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। इससे पहले 13 सितंबर को सामूहिक दुष्कर्म के दोषी पिंटू यादव की भी मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। वह कुशीनगर के कुबेरस्थान के लक्ष्मीपुर का रहने वाला था।
लार के शमशीर नगर मोहल्ला निवासी रिजवान को मार्च 2015 में एक किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तभी से वह जेल में बंद था। सूत्रों के अनुसार जेल जाने से पहले रिजवान नशे का आदी था। इस वजह से बार-बार उसकी तबीयत खराब होती रहती थी। तीन दिन पूर्व तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल भेजवाया। यहां चिकित्सकों ने स्थिति गंभीर देखकर रिजवान को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। शुक्रवार की रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जानकारी मिलने पर जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने रिजवान के परिवारवालों को सूचना दी। इसके बाद रिजवान के भाई और बहन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद उन्हें शव सौंप दिया गया। जेल अधीक्षक केपी त्रिपाठी ने बताया कि तबीयत बिगड़ने पर रिजवान को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
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हफ्तेभर में दो मौत, कटघरे में जेल की स्वास्थ्य व्यवस्था
एक डॉक्टर और तीन फार्मासिस्ट की जेल में रहती है ड्यूटी
13 सितंबर की रात कुशीनगर के कैदी पिंटू की हुई थी मौत।
देवरिया। एक सप्ताह में जेल के एक कैदी और एक बंदी की मौत ने जेल के अंदर की स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक डॉक्टर और तीन फार्मासिस्ट की ड्यूटी होने के बावजूद बंदियों-कैदियों की सही देखभाल न हो पाना चिंता का सबब है। पहले भी जेल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। जेल में बंदियों और कैदियों को पौष्टिक आहार देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य पर ध्यान रखने का आदेश है। इसी निमित्त स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला जेल में एक चिकित्सक और तीन फार्मासिस्ट की तैनाती की गई है। जेल में दवाओं की भी कमी नहीं होने दी जाती। बावजूद आए दिन बंदियों और कैदियों की तबीयत बिगड़ रही है। इससे जेल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जिला जेल से प्रतिदिन कोई न कोई बंदी जिला अस्पताल में उपचार कराने आता है। कुशीनगर के कुबेरस्थान के लक्ष्मीपुर निवासी सामूहिक दुष्कर्म के दोषी पिंटू यादव को 11 सितंबर को तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां 13 सितंबर की रात उसकी मौत हो गई। जानकारी होने पर बंदियों ने इलाज में लापरवाही और भोजन की खराब गुणवत्ता का आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल भी किया था। अब एक सप्ताह के अंदर ही लार के शमशीर नगर मोहल्ला निवासी रिजवान ने भी मेडिकल कॉलेज पहुंचकर दम तोड़ दिया है।
जांच की नहीं है व्यवस्था
देवरिया जिला जेल में इस समय 1700 बंदी हैं। उनके उपचार के लिए एक चिकित्सक और तीन फार्मासिस्ट हैं, लेकिन जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए बंदियों की तबीयत बिगड़ने पर जांच के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता है। जेल अधीक्षक केपी त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश की कुछ जेल में जांच की भी व्यवस्था है। यहां भी जांच की व्यवस्था कराने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा।

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