अयोध्या केस: मुस्लिम पक्षकारों का यू-टर्न, कहा- हमने कभी नहीं कहा कि राम चबूतरा भगवान का जन्मस्थान है
अयोध्या केस (Ayodhya Case): मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हमारा कहना यह है कि यह हिंदुओं का विश्वास है और जिला जज की इस मामले में ऑब्जर्वेशन के बाद हमने इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाया.
नई दिल्ली: सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वकील जफरयाब जिलानी ने अयोध्या केस (Ayodhya Case) में अपनी दलील जारी रखते हुए साफ किया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने यह कतई स्वीकार नहीं किया है कि राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है. हमारा कहना यह है कि यह हिंदुओं का विश्वास है और जिला जज की इस मामले में ऑब्जर्वेशन के बाद हमने इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाया.
जज ने कहा था कि ये राम चबूतरा भगवान राम का जन्मस्थान है. हमने कभी अपनी ओर से नहीं कहा कि ये जन्मस्थान है. हालांकि मंगलवार को 30 वें दिन की सुनवाई के दौरान जफरयाब जिलानी ने कोर्ट में कहा था कि राम चबूतरा राम का जन्मस्थान है और इस पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है.
जिलानी ने कहा कि कल हमने यह नहीं कहा कि 'राम चबूतरा जन्मस्थान है.' हमने कहा था कि 1886 में फैजाबाद कोर्ट के जज ने कहा था कि 'राम चबूतरा' भगवान राम का जन्मस्थान है. हमने उस फैसले को कभी चुनौती नहीं दी. हमने अपनी ओर से नहीं कहा कि ये जन्मस्थान है. जिलानी ने कहा कि 1950 से 1989 के दौर से पहले जन्मस्थान को लेकर यह विवाद नहीं था कि वह मस्जिद के भीतर है. इसके साथ ही वकील जिलानी ने अपनी दलीलें पूरी की.
ASI की रिपोर्ट पर बहस
जिलानी के बाद मुस्लिम पक्ष की तरफ से वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने पुरातत्व विभाग (ASI) की रिपोर्ट पर बहस शुरू की. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि हमको यह जानना होगा कि पुरातत्व क्या होता है, यह सोशल साइंस के नेचर पर निर्भर करता है, कुछ मॉडर्न तकनीकी जैसे कार्बन कोटिंग का इस्तेमाल किया जाता है, यह सोशल साइंस से ज़्यादा नेचुरल साइंस है. पुरातत्व विभाग ने भी कहा है कि उनकी रिपोर्ट को पूरी तरह से सटीक नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह निष्कर्षों, तथ्यों व राय पर आधारित है, यह एकदम सही निष्कर्ष नहीं होता. मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि ASI की रिपोर्ट वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होती है लेकिन फिर भी सेक्शन 45 के तहत इसे टेस्ट किया जाना चाहिए.
वकील की गुजारिश
इससे पहले सुनवाई की शुरुआत में एक वकील हिमांशु शेखर झा ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने राम जन्मस्थान को लेकर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया है और रामचरित मानस पर सवाल उठाया है, उसके खिलाफ दलील देना चाहते हैं. शेखर झा ने कहा कि रामचरित मानस दुनिया की सबसे ज़्यादा प्रामाणिक दस्तावेज़ और इतिहास है. इसके लेकर दलील देना चाहता हूं. सुप्रीम कोर्ट ने झा से पूछा कि आप किसकी तरफ से हैं. झा ने कहा कि मैं किसी की तरफ से नही हूं लेकिन रामचरित मानस को लेकर दलील देना चाहता हूं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने झा को सुनने से मना कर दिया और मुस्लिम पक्ष के वकील ज़फरयाब जिलानी से जिरह शुरू करने को कहा.
मंगलवार को स्वीकारा था कि 'राम चबूतरा' भगवान श्रीराम का जन्मस्थान है
मंगलवार को राजीव धवन के बाद मुस्लिम पक्ष की तरफ से ज़फरयाब जिलानी ने दलील रखते हुए कहा कि कि हिंदू पक्ष के जन्मस्थान के दावे के खिलाफ वो वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस को आधार बनाकर बहस करेंगे. जिलानी ने कहा कि मामला आस्था पर आधारित है और हम दूसरे पक्ष से उम्मीद नहीं करते कि हज़ार साल पीछे जाकर सबूत लाएं. लेकिन रामायण और रामचरित मानस में जन्मभूमि का ज़िक्र नहीं है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि इससे साबित नहीं होता है कि जगह का अस्तित्व नहीं है.
जस्टिस बोबड़े ने जिलानी से पूछा कि आप इस पर बहस नहीं करना चाहते कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ? जिलानी ने कहा कि इस पर बहस हो ही नहीं सकती. हम सिर्फ इसके खिलाफ हैं कि उनका जन्म वहीं हुआ जहां मस्ज़िद थी. जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि आपका मानना है कि राम चबूतरा जन्मस्थान है. जिलानी ने कहा कि जी हां क्योंकि पहले कोर्ट यही कह चुकी है. मुस्लिम पक्ष ने माना कि 'राम चबूतरा' राम जन्मस्थान है. जफरयाब जिलानी ने कहा कि 'हमें यह मानने में कोई ऐतराज नहीं कि राम चबूतरा श्रीराम का जन्म स्थान है क्योंकि ऐसा कोर्ट्स ने भी माना है.'
जस्टिस बोबडे ने मुस्लिम पक्ष के वकील से पूछा कि बाबर ने मस्जिद कहां बनाया था मंदिर तोड़कर या खाली जमीन पर? जिलानी ने कहा कि मंदिर तोड़कर नहीं, खाली जगह पर मस्जिद बनाई गई थी. जफरयाब जिलानी ने 'आईने अकबरी' का जिक्र करते हुए कहा कि ये पुस्तक सभी वर्गों में लोकप्रिय थी. बावजूद इसके 'आईने अकबरी' में भी 'जन्मस्थान' का कहीं जिक्र नहीं मिलता।

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